पुरुषों के प्राइवेट पार्ट्स की पेंटिंग्स से भरे पड़े इस गांव की तस्वीरें देखकर आपका भी हिल जायेगा दिमाग !!

दुनिया में वैसे तो बहुत सारी कलाएं पाई जाती हैं. इन कलाओं में अलग-अलग विशेषताएं होती हैं. कहा जाता है इन कलाओं के माध्यम से हम सीधे-सीधे भगवान से जुड़ जाते हैं. जब भी कोई कलाकार अपनी कला में बहुत ज्यादा डूब जाता है तो वो कला साधना के सामान मानी जाती है. आपने देश और दुनिया की ऐसी बहुत सी कलाओं के बारे में सुना होगा और उन्हें देखा भी होगा जो दुनियाभर में बहुत ज्यादा प्रसिद्ध है, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी कला के बारे में बताने जा रहे हैं जिसको सुनकर आपके भी होश उड़ जायेंगे.

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दीवारों और दरवाजों पर बनी हुई है पुरुषों के प्राइवेट पार्ट की पेंटिंग्स 

आज हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर हर घर के बाहर की दीवारों और दरवाजों पर पुरुषों के लिंग की पेंटिंग बनाई जाती है. आपको भी हैरानी हुई ना? आपको भी लग रहा होगा ये झूठ है. ऐसा हो ही नहीं सकता, लेकिन ये बात 100% सच है तो चलिए आपको बताते है इसके पीछे की वजह…

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भूटान में स्थित है ऐसा गांव 

आपको बता दे कि हम यहाँ जिस गांव की बात कर रहे हैं वो भूटान के थिम्बू शहर के पुनाखा की है. जहां के घरों के बाहर दीवारों और दरवाजों पर पुरुषों के प्राइवेट पार्ट की पेंटिंग बनी हुई है. भूटान के लोगों के लिए ये बहुत आम बात है क्योंकि ये वहां की एक परंपरा है, जो दुनिया में बहुत ज्यादा मशहूर है. इन दिनों इस जगह की बहुत सी तस्वीरें सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रही हैं. जिनको देखकर हर कोई शोक में है.

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दंपत्तियों को आशीर्वाद के रूप में दिए जाते हैं लकड़ी के प्राइवेट पार्ट 

आपको जानकर हैरानी होगी कि जब भूटान में कोई दंपत्ति संतों से मिलने आते हैं, तो वहां के संत आशीर्वाद के रूप में इन दंपत्तियों को लकड़ी से बना हुआ प्राइवेट पार्ट देते हैं. शायद आपको ना पता हो कि ये अनोखी परंपरा थिम्पू शहर के अंदर आने वाले किसी पुनाखा गांव की है.

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15 वीं शताब्दी में हुई थी इस परंपरा की शुरुआत 

इस जगह के बारे में कहा जाता है कि इस जगह में इस अनोखी परंपरा की शुरुआत 15 वीं शताब्दी में ही हो गयी थी. इस कला को पीनिस आर्ट के नाम से जाना जाता है. इस परंपरा की शुरुआत शिक्षा का प्रचार प्रसार करने के लिए की गई थी.

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गुरु द्रुकपा कुनले ने की इस परंपरा की शुरुआत 

बता दें कि तब उस समय तिब्बत के गुरु द्रुकपा कुनले हुआ करते थे, उन्होंने ही इस परंपरा की शुरुआत की थी. बताया जाता है कि गुरु द्रुकपा वहां की एक बेहद खूबसूरत लड़की की तरफ आकर्षित होने लगे थे. इतना ही नहीं उन्होंने उस लड़की के साथ शारीरिक संबंध भी बनाए थे. जिसकी वजह से वो लड़की गर्भवती हो गयी. उस दिन के बाद पुरुषों के प्राइवेट पार्ट की बड़ी सी मूर्ति बनाकर यहां लगा दी और इस जगह का नाम उवर्रता मठ रख दिया गया. हर साल यहां लाखों लोग घूमने आते है और बिना झिझक के इन दीवारों के पास खड़े होकर तस्वीरें खिंचवाते हैं.

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